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[हरियाण(Haryana) के शिक्षा मंत्री]
कार्यालय में

[हरियाणा(Haryana) भाजपा अध्यक्ष]
कार्यालय में

[भाजपा नेता हरियाणा(Haryana)
विधान पार्टी]
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फोटो संग्रह
डॉ. रामबिलास शर्मा के बारे में

प्रोफ़ेसर रामबिलास शर्मा(Prof. Rambilas Sharma) का जन्म महेंद्रगढ़(Mahendergarh) जिले के निकटवर्ती गाँव राठीवास में एक गरीब किसान पंडित दयाराम शर्मा के घर सन 1949 में हुआ. गरीब परिवार में जन्म लेने और आर्थिक आभाव के होते हुए भी उन्होंने स्नातक तक शिक्षा प्राप्त की, जो अपने आप में बहुत बड़ी उपलब्धि थी.

प्रो. रामबिलास शर्मा(Prof. Rambilas Sharma) जी ने अपनी प्राथमिक शिक्षा गाँव में ही पूरी की. उनके बारे में एक रोचक तथ्य यह है की कक्षा तीसरी तक उन्होंने ने रेलगाडी नहीं देखि थी जब पहली बार उन्होंने रेलगाडी को देखा तो यह सोच कर भाग खड़े हुए की ये अद्भुत सी दिखने वाली चीज़ क्या है. उन्होंने अपनी इंटर निकटवर्ती प्रान्त माधोपुर से पूरी की. तदओप्रांत वे अपने बी.ए. की पढाई पूरी करने के लिए महेंद्रगढ़(Mahendergarh) कॉलेज गए, कॉलेज टाइम में वे राष्ट्रीय सवंसेवक संघ के संपर्क में आये और उसकी विचारधारा से परभावित होकर उनके प्रचारक के रूप में काम किया.

उन्होंने हरियाणा(Haryana) प्रान्त में होने वाले सभी आन्दोलनों में बढ़ चढ़ कर भाग लिया. महेंद्रगढ़(Mahendergarh) जिले में होने वाले मुलिया बावरिया आन्दोलन में उन्होंने अहम भूमिका निभाई. सन् 1976 में हुए बहुचर्चित जयप्रकाश आन्दोलन के दोरान वो डॉ. मंगल सेन जी के संपर्क में आये. प्रो. रामबिलास शर्मा(Prof. Rambilas Sharma) के व्यक्तितव से प्रभावित होकर डॉ. मंगल सेन जी ने उनसे अध्यापन कार्ये छुड़वाया. प्रो.रामबिलास शर्मा(Prof. Rambilas Sharma) जन संघ के कुरुक्षेत्र जिले के संगठन महामंत्री बने. आन्दोलनों के दोरान उन्हें जेल भी जाना पड़ा. आपातकाल के समय आन्दोलन में बढ़ चढ़ कर भाग लेने के कारण उन्हें गया(बिहार) जेल में डाल दिया गया. वहां पर उन्हें अमान्विये यातना झेलनी पड़ी.

प्रो. रामबिलास शर्मा(Prof. Rambilas Sharma) सन् 1977 में राजनीती में कूद पड़े. उन्होंने अपनी गरीबी को कभी अपने आढे नहीं आने दिया. उस समय गरीबी और राजनीती का दूर-दूर तक कोई संगम नहीं था. इस तरह राजनीती में आकर उन्होंने गरीब व्यक्ति को एक नयी दिशा प्रदान की. उन्होंने राजनीती को जनसेवा के रूप में अपनाया. प्रो. रामबिलास शर्मा(Prof. Rambilas Sharma) के जीवन का लक्ष्य लोगो की सेवा था उनके लिए पैसे का कोई मोल नहीं था. वे साधू और संतो के प्रति असीम श्रधा रखते थे. अपने कार्यकाल के दोरान उन्होंने साधू-संतो के लिए मंदिरों में पानी तथा बिजली की वयवस्था करवाई.